मुख्यमंत्री को पदच्युत करने में राज्यपाल की भूमिका
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
समाचार में
- तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने चुनावी हार के बाद मुख्यमंत्री पद से त्येग्पत्र देने से मना कर दिया, परिणाम को षड्यंत्र बताते हुए चुनावों में धांधली और केंद्रीय बलों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
क्या आप जानते हैं?
- चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिनों के अंदर कलकत्ता उच्च न्यायालय में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 100 के अंतर्गत चुनाव याचिका दायर कर चुनाव को चुनौती दी जा सकती है।
- आधार: भ्रष्ट आचरण या चुनाव नियमों का उल्लंघन।
- यदि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठे, तो रिट याचिका भी दायर की जा सकती है। उदाहरण: मतदाता सूची संशोधन के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की विलोपन, जिसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।
मुख्यमंत्री
- संविधान का अनुच्छेद 164(1) अनुसार, मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और मंत्रीगण “राज्यपाल के प्रसादपर्यंत” तक पद पर बने रहते हैं।
- सामान्यतः राज्यपाल मंत्रिपरिषद की “सलाह और सहायता” पर कार्य करते हैं, जिससे इस शक्ति का मनमाना प्रयोग रोका जाता है।
राज्यपाल की भूमिका
- यदि राज्यपाल को संदेह हो कि मुख्यमंत्री विधानसभा में बहुमत समर्थन रखते हैं या नहीं, तो सदन में फ्लोर टेस्ट कराया जाता है।
- इस प्रक्रिया में मुख्यमंत्री को आधे से अधिक विधायकों का समर्थन सिद्ध करना होता है।
- यदि मुख्यमंत्री बहुमत सिद्ध करने में असफल रहते हैं, तो उन्हें त्यागपत्र देना पड़ता है।
- यदि कोई दल स्थिर सरकार बनाने में सक्षम न हो, तो अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या
- ए.जी. पेरारिवलन बनाम राज्य (पुलिस अधीक्षक के माध्यम से) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल सामान्यतः मंत्रिपरिषद की “परामर्श और सहायता” पर कार्य करते हैं।
- राज्यपाल मुख्यतः संवैधानिक/औपचारिक प्रमुख होते हैं, स्वतंत्र प्राधिकारी नहीं।
अनुच्छेद 172 (Article 172)
- यह राज्य विधानसभा का कार्यकाल निर्धारित करता है।
- विधानसभा सामान्यतः अपनी प्रथम बैठक की तिथि से पाँच वर्ष तक चलती है, जब तक कि इसे पूर्व भंग न किया जाए।
- पाँच वर्ष की अवधि पूरी होने पर विधानसभा स्वतः भंग हो जाती है और नई विधानसभा तथा सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त होता है।
स्रोत: TH
विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026
पाठ्यक्रम: GS2/भारतीय प्रवासी
संदर्भ
- अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026 जारी की, जिसमें भारत–यूएई और भारत–अमेरिका प्रवासन गलियारों को 2024 में शीर्ष 10 अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन गलियारों में शामिल किया गया।
प्रमुख निष्कर्ष
- 2024 में अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी वैश्विक जनसंख्या का 3.7% थे, जबकि 1990 में यह 2.9% था।
- 2024 के मध्य तक लगभग 304 मिलियन लोग अपने जन्म देश से बाहर रह रहे थे।
- विश्व का सबसे बड़ा प्रवासन गलियारा मेक्सिको–संयुक्त राज्य अमेरिका रहा, जिसमें लगभग 11 मिलियन प्रवासी शामिल हैं।
- अन्य प्रमुख गलियारे: अफगानिस्तान–ईरान, सीरिया–तुर्की और रूस–यूक्रेन।
भारत–यूएई प्रवासन गलियारा
- यह विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा प्रवासन गलियारा है।
- यूएई में 8 मिलियन से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी रहते हैं, जो उसकी कुल जनसंख्या का लगभग 74% हैं।
- भारतीय प्रवासी समुदाय सबसे बड़ा है, जिसकी संख्या 3 मिलियन से अधिक है।
- यह गलियारा मुख्यतः श्रम प्रवासन से प्रभावित है, विशेषकर निर्माण, सेवाएँ, परिवहन और घरेलू कार्य क्षेत्रों में।
भारत–अमेरिका प्रवासन गलियारा
- यह विश्व का छठा सबसे बड़ा प्रवासन गलियारा है।
- 2024 में लगभग 3.2 मिलियन भारतीय प्रवासी अमेरिका में रह रहे थे।
- भारतीय प्रवासी अमेरिका में मैक्सिकन प्रवासियों के बाद दूसरा सबसे बड़ा विदेशी समुदाय हैं।
- प्रवासन के प्रमुख कारण:
- उच्च कौशल वाले पेशेवर।
- सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कर्मचारी।
- अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी।
- स्वास्थ्य सेवा पेशेवर और शोधकर्ता।
स्रोत: TH
कर्नाटक का नया गिग वर्कर शिकायत निवारण तंत्र
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- कर्नाटक सरकार ने राज्य में प्लेटफ़ॉर्म-आधारित गिग वर्करों के लिए विशेष शिकायत निवारण तंत्र को लागू करने की घोषणा की।
परिचय
- पृष्ठभूमि:कर्नाटक प्लेटफ़ॉर्म-आधारित गिग वर्कर (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) अधिनियम, 2025 को 2025 में अधिसूचित किया गया।
- 2026 में कर्नाटक गिग वर्करों के लिए नियम अधिसूचित करने वाला प्रथम भारतीय राज्य बना।
- शिकायत निवारण तंत्र इस अधिनियम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- उद्देश्य : प्रक्रिया में अधिक संरचना और पारदर्शिता लाना।
- औपचारिक अर्थव्यवस्था से बाहर कार्यरत इन श्रमिकों को कानूनी उपाय उपलब्ध कराना।
- विशेषताएँ : श्रमिक एकीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली (IPGRS) के माध्यम से आधिकारिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- शिकायतें वेतन, कार्य परिस्थितियों और प्लेटफ़ॉर्म-विशिष्ट विवादों से संबंधित हो सकती हैं।
- प्रत्येक एग्रीगेटर प्लेटफ़ॉर्म को आंतरिक विवाद निवारण समिति (IDRC) गठित करनी होगी।
- IPGRS पर दर्ज शिकायतें स्वतः संबंधित प्लेटफ़ॉर्म की IDRC को भेजी जाएँगी।
- IDRC को 15 कार्य दिवसों में समाधान का प्रयास करना होगा और अधिकतम 45 दिनों में अंतिम आदेश देना होगा।
- अंतिम निर्णय से असंतुष्ट पक्ष 30 दिनों के अंदर मामला कर्नाटक गिग वर्कर कल्याण बोर्ड तक ले जा सकता है।
स्रोत: TH
भारत में प्रथम IBCA शिखर सम्मेलन की मेज़बानी
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
समाचार में
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने नई दिल्ली में प्रथम अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) शिखर सम्मेलन 2026 के लिए वेबसाइट और लोगो का शुभारंभ किया।
अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस
- यह एक अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मुख्यालय भारत में स्थित है।
- इसे 2023 में प्रोजेक्ट टाइगर की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रारंभ किया गया।
- इसमें 24 सदस्य देश, 3 पर्यवेक्षक देश और कई अन्य “रेन्ज” देश शामिल हैं।
- उद्देश्य: सात बिग कैट– बाघ, सिंह, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा – का संरक्षण।
- सदस्यता: सभी संयुक्त राष्ट्र देश, वे “रेन्ज” देश जहाँ ये प्रजातियाँ पाई जाती हैं, तथा वे गैर-रेन्ज देश जो ऐतिहासिक रूप से इन प्रजातियों के बिना भी संरक्षण में सहयोग करना चाहते हैं।
- प्राथमिक लक्ष्य: वैश्विक स्तर पर बिग कैट के संरक्षण हेतु सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना, सफल संरक्षण प्रथाओं एवं विशेषज्ञता को साझा करना।
- यह संरक्षण एजेंडा को सुदृढ़ करने, बिग कैट की जनसंख्या में गिरावट रोकने और वर्तमान प्रवृत्तियों को उलटने का प्रयास करता है।
स्रोत: PIB
कोयला विद्युत संयंत्रों से SO₂ उत्सर्जन में कमी
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
समाचार में
- नेचर पत्रिका में प्रकाशित IIT दिल्ली के एक नए अध्ययन के अनुसार, भारत में कोयला-आधारित विद्युत संयंत्रों (CFPPs) से SO₂ उत्सर्जन को पूरी तरह कम करने से प्रतिवर्ष लगभग 1,24,564 मृत्युओं को रोका जा सकता है।
प्रमुख निष्कर्ष
- प्रदूषण तंत्र: CFPPs से उत्सर्जित SO₂ वातावरण में प्रतिक्रिया कर सल्फेट, नाइट्रेट और अमोनियम एरोसोल बनाता है।
- ये PM2.5 प्रदूषण में योगदान करते हैं, जो हृदय और फेफड़ों की बीमारियों से जुड़ा है।
- उत्सर्जन प्रवृत्ति: 2005–2021 के बीच वैश्विक SO₂ उत्सर्जन घटा, जबकि भारत में यह 2.36 से बढ़कर 5.05 हजार किलो टन हुआ।
- 2023 में ~30% अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई।
- स्वास्थ्य प्रभाव: प्रतिवर्ष लगभग 14,777 हृदय रोग संबंधी मृत्युएँ रोकी जा सकती हैं।
- प्रतिवर्ष लगभग 8,476 श्वसन रोग संबंधी मृत्युएँ रोकी जा सकती हैं।
- राज्यवार आँकड़े: महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक में उच्च जनसंख्या प्रदूषण के संपर्क में होने से सबसे अधिक बचाई जा सकने वाली मौतें।
- छत्तीसगढ़ और ओडिशा में वायु गुणवत्ता में सबसे बड़ा सुधार अपेक्षित, क्योंकि वहाँ कई कोयला-आधारित प्रदूषण हॉटस्पॉट हैं।
- समानता: SO₂ कमी से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और निम्न/मध्यम आय वर्ग को अधिक लाभ मिलेगा।
भारत में उठाए गए कदम
- 2015 में भारत ने विद्युत संयंत्रों के लिए कठोर उत्सर्जन मानदंड लागू किए, जिनमें SO₂ सीमा और FGD आवश्यकताएँ शामिल थीं।
- FGD तकनीक जीवाश्म ईंधन संयंत्रों और औद्योगिक बॉयलरों से SO₂ हटाती है।
- 2025 में लगभग 79% कोयला संयंत्रों को FGD लगाने से छूट दी गई।
तकनीकी परिचर्चा
- FGD प्रणाली SO₂ उत्सर्जन को हटाती है।
- आलोचकों का तर्क: भारतीय कोयले में सल्फर कम है, जिससे FGD महँगा पड़ता है।
- अध्ययन का तर्क: स्वास्थ्य लाभ स्थापना लागत से कहीं अधिक हैं।
अनुशंसाएँ
- SO₂ उत्सर्जन मानदंडों का कठोर प्रवर्तन।
- FGD और प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों का व्यापक उपयोग।
- प्रदूषण हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर विशेष ध्यान।
- पूरक उपाय: स्वच्छ ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, पराली जलाने में कमी।
स्रोत: IE
ईवी बैटरी पुनर्चक्रण को सुदृढ़ करने हेतु संयुक्त पहल
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
समाचार में (In News)
- भारत और यूरोपीय संघ ने भारत–ईयू व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) – कार्य समूह 2 के अंतर्गत ईवी बैटरी पुनर्चक्रण को मज़बूत करने हेतु संयुक्त पहल शुरू की।
| कार्य समूह 2 (WG2) का फोकस हरित और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों पर है, जिसमें बैटरी पुनर्चक्रण को एक सामरिक प्राथमिकता के रूप में पहचाना गया है। |
भारत–ईयू ईवी बैटरी पुनर्चक्रण पहल के बारे में
- इसका उद्देश्य ईवी बैटरी पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है, जिसके लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
- इसका वित्तपोषण यूरोपीय संघ के होराइजन यूरोप कार्यक्रम के माध्यम से किया जाएगा, जबकि भारतीय घटक का समर्थन भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) करेगा।
- यह उन्नत पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों के विकास पर केंद्रित होगा, जिनमें उच्च दक्षता वाली सामग्री पुनर्प्राप्ति, सुरक्षित और डिजिटल संग्रह प्रणाली, तथा नवोन्मेषी प्रक्रियाओं का पायलट-स्तरीय प्रदर्शन शामिल है।
- यह भारत में एक संयुक्त भारत–ईयू पायलट लाइन की स्थापना का भी समर्थन करेगा, जिससे वास्तविक परीक्षण और औद्योगिक परिनियोजन संभव होगा, और इसमें प्रमुख शोधकर्ताओं, उद्योगों तथा स्टार्टअप्स को एक साथ लाया जाएगा।
- यह उच्च सामग्री पुनर्प्राप्ति, मिश्रित बैटरी प्रकारों का प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स में सुधार, सुरक्षा सुनिश्चित करना, तथा लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट जैसे प्रमुख खनिजों के पुनः उपयोग पर भी केंद्रित होगा।
भारत की प्रगति
- भारत में ईवी बैटरी पुनर्चक्रण बाज़ार में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है।
- मूल्यांकन: ₹1,380 करोड़ – ₹3,510 करोड़ (2024–25); अनुमानित वृद्धि: ₹4,14,000 करोड़ (2035 तक)।
- नीति आयोग का अनुमान: 2030 तक 128 GWh पुनर्चक्रण योग्य बैटरी क्षमता, मुख्यतः सार्वजनिक परिवहन और ईवी क्षेत्र से।
- इस स्तर पर पुनर्चक्रण से बैटरी उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन 90% तक कम हो सकता है।
- परिणामस्वरूप, लिथियम-आयन बैटरियों का पुनर्चक्रण द्वितीयक सामग्री स्रोत के रूप में भारत और ईयू दोनों सरकारों का प्रमुख फोकस क्षेत्र बन गया है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय आयात पर निर्भरता कम हो सके।
स्रोत: PIB
समग्र शिक्षा शिक्षक
पाठ्यक्रम: GS2/सरकारी पहल
संदर्भ
- दिल्ली सरकार ने व्यावसायिक शिक्षकों और समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों के वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि को स्वीकृति प्रदान की है।
समग्र शिक्षा योजना
- यह एक एकीकृत योजना है, जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई थी।
- यह योजना विद्यालय शिक्षा को आच्छादित करती है, जिसमें पूर्व-प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक (कक्षा 12 तक) की संपूर्ण शिक्षा शामिल है।
- प्रकार: केंद्रीय प्रायोजित योजना (राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी)।
- पूर्ववर्ती योजनाओं का समावेश : सर्व शिक्षा अभियान (SSA)
- राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA)
- शिक्षक शिक्षा (TE)
- उद्देश्य : सतत विकास लक्ष्य 4 (SDG 4) का क्रियान्वयन।
- शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करना।
- नई शिक्षा नीति (NEP) को लागू करना।
- कवरेज : 11.6 लाख विद्यालय।
- 15.6 करोड़ से अधिक विद्यार्थी।
- 57 लाख शिक्षक (सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में)।
स्रोत: AIR
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संक्षिप्त समाचार 07-05-2026